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mahabharat 1.172.30: वह सुन्दर भौंहों वाली कन्या गर्म आकाश से पृथ्वी पर गिरते समय और भी अधिक सुन्दर लग रही थी, तथा अपनी विद्युत् प्रभा से समस्त दिशाओं को प्रकाशित कर रही थी।   |   mahabharat अध्याय 1.172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.172.30 
रुरुचे साधिकं सुभ्रूरापतन्ती नभस्तलात्।
सौदामिनीव विभ्रष्टा द्योतयन्ती दिशस्त्विषा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वह सुन्दर भौंहों वाली कन्या गर्म आकाश से पृथ्वी पर गिरते समय और भी अधिक सुन्दर लग रही थी, तथा अपनी विद्युत् प्रभा से समस्त दिशाओं को प्रकाशित कर रही थी।
 
The beautiful eyebrowed one was looking more beautiful while falling to the earth from the hot sky, illuminating all directions with her radiance like lightning.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)