Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.172.23: उस राजा की कीर्ति दूर-दूर तक फैली हुई है। वह धर्म और अर्थ का ज्ञाता और उदार बुद्धि वाला है; इसलिए हे आकाश में विचरण करने वाले सूर्यदेव! महाराज संवरण आपकी पुत्री के लिए उपयुक्त वर होंगे॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 1.172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स हि राजा बृहत्कीर्तिर्धर्मार्थविदुदारधी:।
युक्त: संवरणो भर्ता दुहितुस्ते विहंगम॥ २३॥
अनुवाद
उस राजा की कीर्ति दूर-दूर तक फैली हुई है। वह धर्म और अर्थ का ज्ञाता और उदार बुद्धि वाला है; इसलिए हे आकाश में विचरण करने वाले सूर्यदेव! महाराज संवरण आपकी पुत्री के लिए उपयुक्त वर होंगे॥ 23॥
The fame of that king has spread far and wide. He is a knower of Dharma and Artha and has a generous mind; therefore, O Sun God who travels in the sky, Maharaja Samvaran will be a suitable husband for your daughter.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥