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mahabharat 1.172.12: तत्पश्चात् उस महान पर्वत पर स्नान करके वह भगवान सूर्य की आराधना करने के लिए हाथ जोड़कर तथा ऊपर की ओर मुख करके भूमि पर खड़ा हो गया॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.172.12 
ततस्तस्मिन् गिरिवरे शुचिर्भूत्वा कृताञ्जलि:।
आरिराधयिषु: सूर्यं तस्थावूर्ध्वमुख: क्षितौ॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस महान पर्वत पर स्नान करके वह भगवान सूर्य की आराधना करने के लिए हाथ जोड़कर तथा ऊपर की ओर मुख करके भूमि पर खड़ा हो गया॥12॥
 
Thereafter, after taking bath on that great mountain, he stood on the ground with folded hands and face upwards to worship Lord Surya. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)