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श्लोक 1.168.13  |
पुनरेवाब्रवीद् देव इदं वचनमुत्तमम्।
पञ्चकृत्वस्त्वया ह्युक्त: पतिं देहीत्यहं पुन:॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| तब प्रभु ने उससे पुनः यह अच्छी बात कही - 'हे प्रिये! तुमने मुझसे पाँच बार पति माँगा है॥13॥ |
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| Then the Lord again said this good thing to her - 'O dear! You have asked me five times to give me a husband.॥ 13॥ |
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