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mahabharat 1.165.6: ऋषि भारद्वाज के मित्र पृषत नामक एक राजा थे। उन्हीं दिनों राजा पृषत का एक पुत्र भी था जिसका नाम द्रुपद था।   |   mahabharat अध्याय 1.165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.165.6 
भरद्वाजस्य तु सखा पृषतो नाम पार्थिव:।
तस्यापि द्रुपदो नाम तदा समभवत् सुत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
ऋषि भारद्वाज के मित्र पृषत नामक एक राजा थे। उन्हीं दिनों राजा पृषत का एक पुत्र भी था जिसका नाम द्रुपद था।
 
A king named Prishat was a friend of sage Bharadwaj. During those days, King Prishat also had a son named Drupada.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)