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mahabharat 1.165.3: जब वह नदी के किनारे खड़ी होकर वस्त्र बदलने ही वाली थी कि तेज हवा के झोंके से उसकी साड़ी उड़ गई। वस्त्र उतारे जाने के बाद उसे नग्न देखकर ऋषि ने उसे प्राप्त करने की इच्छा की।   |   mahabharat अध्याय 1.165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.165.3 
तस्या वायुर्नदीतीरे वसनं व्यहरत् तदा।
अपकृष्टाम्बरां दृष्ट्वा तामृषिश्चकमे तदा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब वह नदी के किनारे खड़ी होकर वस्त्र बदलने ही वाली थी कि तेज हवा के झोंके से उसकी साड़ी उड़ गई। वस्त्र उतारे जाने के बाद उसे नग्न देखकर ऋषि ने उसे प्राप्त करने की इच्छा की।
 
When she was standing on the bank of the river and was about to change her clothes, the wind blew away her sari. Seeing her naked after her clothes were removed, the sage desired to possess her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)