Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.165.23-24: द्रोणाचार्य बोले- हे राजन! मैं अब भी आपसे मित्रता का अनुरोध करता हूँ। यज्ञसेन! आपने कहा था कि जो राजा नहीं है, वह राजा का मित्र नहीं हो सकता; इसलिए मैंने राज्य प्राप्ति हेतु आपसे युद्ध करने का प्रयत्न किया है। आप गंगा के दक्षिणी तट के राजा होंगे और मैं उत्तरी तट का राजा रहूँगा। | mahabharat अध्याय 1.165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रोणाचार्य बोले- हे राजन! मैं अब भी आपसे मित्रता का अनुरोध करता हूँ। यज्ञसेन! आपने कहा था कि जो राजा नहीं है, वह राजा का मित्र नहीं हो सकता; इसलिए मैंने राज्य प्राप्ति हेतु आपसे युद्ध करने का प्रयत्न किया है। आप गंगा के दक्षिणी तट के राजा होंगे और मैं उत्तरी तट का राजा रहूँगा।
Dronacharya said— O King! I still request you for friendship. Yajnasen! You had said that one who is not a king cannot be a friend of a king; hence I have tried to fight with you to gain the kingdom. You will be the king of the southern bank of the Ganga and I will be the king of the northern bank.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥