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श्लोक 1.163.12-13  |
एकचक्रां ततो गत्वा प्रवृत्तिं प्रददु: पुरे।
तत: सहस्रशो राजन् नरा नगरवासिन:॥ १२॥
तत्राजग्मुर्बकं द्रष्टुं सस्त्रीवृद्धकुमारका:।
ततस्ते विस्मिता: सर्वे कर्म दृष्ट्वातिमानुषम्।
दैवतान्यर्चयांचक्रु: सर्व एव विशाम्पते॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| राजा ! उसने एकचक्रा नगर में जाकर यह समाचार सारे नगर में फैला दिया; तब स्त्रियों, बालकों और वृद्धों सहित हजारों लोग बकासुर को देखने के लिए वहाँ आये। उस समय उस अमानवीय कृत्य को देखकर सभी को बड़ा आश्चर्य हुआ। जनमेजय ! उन सभी लोगों ने देवताओं की आराधना की। 12-13. |
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| King! He went to the city of Ekachakra and spread this news throughout the city; then thousands of people including women, children and old people came there to see Bakasura. At that time everyone was very surprised to see that inhuman act. Janamejaya! All those people worshiped the gods. 12-13. |
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