| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 16: कद्रू और विनताको कश्यपजीके वरदानसे अभीष्ट पुत्रोंकी प्राप्ति » श्लोक 5-8 |
|
| | | | श्लोक 1.16.5-8  | पुरा देवयुगे ब्रह्मन् प्रजापतिसुते शुभे।
आस्तां भगिन्यौ रूपेण समुपेतेऽद्भुतेऽनघ॥ ५॥
ते भार्ये कश्यपस्यास्तां कद्रूश्च विनता च ह।
प्रादात् ताभ्यां वरं प्रीत: प्रजापतिसम: पति:॥ ६॥
कश्यपो धर्मपत्नीभ्यां मुदा परमया युत:।
वरातिसर्गं श्रुत्वैवं कश्यपादुत्तमं च ते॥ ७॥
हर्षादप्रतिमां प्रीतिं प्रापतु: स्म वरस्त्रियौ।
वव्रे कद्रू: सुतान् नागान् सहस्रं तुल्यवर्चस:॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | ब्रह्मन्! प्रथम सत्ययुग में दक्ष प्रजापति की दो शुभ कन्याएँ थीं- कद्रू और विनता। वे दोनों बहनें सुन्दरी और अद्भुत थीं। अनघ! उन दोनों का विवाह महर्षि कश्यपजी से हुआ था। एक दिन प्रजापति ब्रह्माजी के समान पराक्रमी पतिव्रता महर्षि कश्यप ने बड़े हर्ष से भरकर प्रसन्नतापूर्वक अपनी दोनों पत्नियों को वरदान दिया और कहा- 'तुममें से जो भी चाहे, वर माँग ले।' इस प्रकार कश्यपजी से उत्तम वर मिलने की बात सुनकर प्रसन्न होकर उन दोनों सुन्दर स्त्रियों को अतुलनीय आनन्द की प्राप्ति हुई। कद्रू ने अपने समान तेजस्वी एक हजार सर्पों को पुत्र रूप में प्राप्त करने का वर माँगा। 5-8॥ | | | | Brahman! In the first Satyayuga, Daksh Prajapati had two auspicious daughters – Kadru and Vinata. Both of those sisters were beautiful and amazing. Anagh! Both of them were married to Maharishi Kashyapji. One day, Maharishi Kashyapa, a powerful husband like Prajapati Brahmaji, filled with great joy and happily gave boon to his two wives and said - 'Whoever of you wishes, ask for the boon.' In this way, being happy to hear about getting the best boon from Kashyapaji, those two beautiful women got incomparable joy. Kadru asked for the boon of getting a thousand snakes as bright as him as his son. 5-8॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|