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श्लोक 1.159.17  |
सहैवैतैर्गमिष्यामि बान्धवैरद्य राक्षसम्।
ततो न: सहितान् क्षुद्र: सर्वानेवोपभोक्ष्यति॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| अब मैं इन सम्बन्धियों सहित राक्षस के पास जाऊँगा; तब वह नीच रात्रिचर प्राणी हम सबको एक साथ खा जाएगा॥17॥ |
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| Now I will go to the demon along with these relatives; then that vile night creature will devour us all at once.॥ 17॥ |
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इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि बकवधपर्वणि कुन्तीप्रश्ने एकोनषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत बकवधपर्वमें कुन्तीप्रश्नविषयक एक सौ उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५९॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल १९ श्लोक हैं) |
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