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mahabharat 1.158.8: यदि मेरे पिता मर जाएँ और मेरा भाई भी मर जाए, तो पितरों का शरीर लुप्त हो जाएगा, जो उनके लिए बहुत ही अप्रिय होगा ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.158.8 
तातेऽपि हि गते स्वर्गं विनष्टे च ममानुजे।
पिण्ड: पितॄणां व्युच्छिद्येत् तत् तेषां विप्रियं भवेत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि मेरे पिता मर जाएँ और मेरा भाई भी मर जाए, तो पितरों का शरीर लुप्त हो जाएगा, जो उनके लिए बहुत ही अप्रिय होगा ॥8॥
 
If my father dies and my brother also dies, then the body of the ancestors will disappear, which will be very unpleasant for them. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)