श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.158.4 
इत्यर्थमिष्यतेऽपत्यं तारयिष्यति मामिति।
अस्मिन्नुपस्थिते काले तरध्वं प्लववन्मया॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘संतान की इच्छा इसलिए की गई है कि वह मुझे संकटों से बचा लेगी। अतः इस समय जो संकट उत्पन्न हुआ है, उसमें तुम सब लोग मुझे नाव के समान उपयोग करो और दुःख रूपी सागर से पार हो जाओ।॥4॥
 
‘The desire for a child is made because it will save me from troubles. Therefore, in the current crisis that has arisen, you all should use me like a boat and cross the ocean of sorrow.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)