श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.158.3 
धर्मतोऽहं परित्याज्या युवयोर्नात्र संशय:।
त्यक्तव्यां मां परित्यज्य त्राहि सर्वं मयैकया॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि एक न एक दिन तुम दोनों को अपने धर्मानुसार मुझे त्यागना ही पड़ेगा। चूँकि मुझे त्यागना ही है, इसलिए आज ही मुझे त्याग दो और मेरे द्वारा ही इस सम्पूर्ण कुल की रक्षा करो॥3॥
 
'There is no doubt that one day or the other you both will have to abandon me as per your Dharma. Since I am to be abandoned, then abandon me today itself and protect this entire clan through me alone.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)