मा पिता रुद मा मातर्मा स्वसस्त्विति चाब्रवीत्।
प्रहसन्निव सर्वांस्तानेकैकमनुसर्पति॥ २१॥
तत: स तृणमादाय प्रहृष्ट: पुनरब्रवीत्।
अनेनाहं हनिष्यामि राक्षसं पुरुषादकम्॥ २२॥
अनुवाद
'पिताजी! मत रोओ, माँ! मत रोओ, बहन! मत रोओ,' वह मुस्कुराता हुआ सबके पास जाता और सबसे एक ही बात कहता। फिर वह एक तिनका उठाकर बड़े आनंद से कहता - 'इससे मैं उस नरभक्षी राक्षस को मार डालूँगा।'
‘Father! Don't cry, mother! Don't cry, sister! Don't cry, he used to go to everyone smiling and say the same thing to everyone. Then he picked up a straw and said in great joy - 'With this I will kill that cannibal demon'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥