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mahabharat 1.158.20: तब उन सबको रोते देखकर वह छोटा ब्राह्मण बालक प्रसन्न नेत्रों से उनकी ओर देखकर बालसुलभ, अस्पष्ट एवं मधुर वाणी में बोला-॥20॥   |   mahabharat अध्याय 1.158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.158.20 
तत: प्ररुदितान् सर्वान् निशम्याथ सुतस्तदा।
उत्फुल्लनयनो बाल: कलमव्यक्तमब्रवीत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब उन सबको रोते देखकर वह छोटा ब्राह्मण बालक प्रसन्न नेत्रों से उनकी ओर देखकर बालसुलभ, अस्पष्ट एवं मधुर वाणी में बोला-॥20॥
 
Then, seeing them all crying, the little Brahmin's child looked at them with joyful eyes and spoke in a childish voice, unclear and sweet -॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)