वैशम्पायन उवाच
तयोर्दु:खितयोर्वाक्यमतिमात्रं निशम्य तु।
ततो दु:खपरीताङ्गी कन्या तावभ्यभाषत॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे जनमेजय! शोक में डूबे हुए अपने माता-पिता के ये वचन सुनकर वह कन्या समस्त अंगों में शोक से भर गई; उसने अपने माता और पिता दोनों से कहा:॥1॥
Vaishmpayana says: O Janamejaya, on hearing these words of her parents who were drowned in grief, the girl was filled with grief in all her limbs; she said to both her mother and father:॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥