Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.158.1: वैशम्पायनजी कहते हैं: हे जनमेजय! शोक में डूबे हुए अपने माता-पिता के ये वचन सुनकर वह कन्या समस्त अंगों में शोक से भर गई; उसने अपने माता और पिता दोनों से कहा:॥1॥ | mahabharat अध्याय 1.158: ब्राह्मण-कन्याके त्याग और विवेकपूर्ण वचन तथा कुन्तीका उन सबके पास जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
तयोर्दु:खितयोर्वाक्यमतिमात्रं निशम्य तु।
ततो दु:खपरीताङ्गी कन्या तावभ्यभाषत॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे जनमेजय! शोक में डूबे हुए अपने माता-पिता के ये वचन सुनकर वह कन्या समस्त अंगों में शोक से भर गई; उसने अपने माता और पिता दोनों से कहा:॥1॥
Vaishmpayana says: O Janamejaya, on hearing these words of her parents who were drowned in grief, the girl was filled with grief in all her limbs; she said to both her mother and father:॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥