Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.157.6: यही सबसे बड़ा धर्म है, जो मैं तुम्हें बता रहा हूँ। इसमें तुम्हें अधिकतम स्वार्थ और धार्मिक लाभ दिखाई देता है ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.157.6 
एष चैव गुरुर्धर्मो यं प्रवक्ष्याम्यहं तव।
अर्थश्च तव धर्मश्च भूयानत्र प्रदृश्यते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यही सबसे बड़ा धर्म है, जो मैं तुम्हें बता रहा हूँ। इसमें तुम्हें अधिकतम स्वार्थ और धार्मिक लाभ दिखाई देता है ॥6॥
 
This is the greatest religion, which I am telling you. In this you can see maximum self-interest and religious benefit. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)