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mahabharat 1.157.25: इसलिए मैं जो कार्य करना चाहता हूँ, वह महापुरुषों द्वारा स्वीकृत धर्म है और तुम्हारे तथा इस परिवार के लिए सर्वथा उपयुक्त एवं हितकारी है ॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.157.25 
तदिदं यच्चिकीर्षामि धर्मं परमसम्मतम्।
इष्टं चैव हितं चैव तव चैव कुलस्य च॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इसलिए मैं जो कार्य करना चाहता हूँ, वह महापुरुषों द्वारा स्वीकृत धर्म है और तुम्हारे तथा इस परिवार के लिए सर्वथा उपयुक्त एवं हितकारी है ॥ 25॥
 
Therefore the work I want to do is the Dharma approved by the great men and is absolutely suitable and beneficial for you and this family. ॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)