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mahabharat 1.157.23: हे आर्यपुत्र! तुम्हारे लिए मैंने अपने पुत्र-पुत्री, समस्त बंधु-बांधवों और मित्रों को त्याग दिया है और अब मैं यह जीवन भी त्यागने को तैयार हूँ।   |   mahabharat अध्याय 1.157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.157.23 
परित्यक्त: सुतश्चायं दुहितेयं तथा मया।
बान्धवाश्च परित्यक्तास्त्वदर्थं जीवितं च मे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे आर्यपुत्र! तुम्हारे लिए मैंने अपने पुत्र-पुत्री, समस्त बंधु-बांधवों और मित्रों को त्याग दिया है और अब मैं यह जीवन भी त्यागने को तैयार हूँ।
 
O Aryaputra! For you I have given up my son and daughter, all my relatives and friends and now I am ready to give up this life also. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)