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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 157: ब्राह्मणीका स्वयं मरनेके लिये उद्यत होकर पतिसे जीवित रहनेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.157.10 
कथं हि विधवानाथा बालपुत्रा विना त्वया।
मिथुनं जीवयिष्यामि स्थिता साधुगते पथि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मेरा बेटा अभी बच्चा है। तुम्हारे बिना, मैं, एक अनाथ विधवा, कैसे सही रास्ते पर रह पाऊँगी और इन दोनों बच्चों का पालन-पोषण कैसे कर पाऊँगी? 10.
 
My son is still a child. Without you, how will I, an orphaned widow, stay on the right path and raise these two children? 10.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)