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mahabharat 1.156.39: जब मैं अपने को त्यागकर परलोक में चला जाऊँगा, तब भी मुझे सदैव इस बात का दुःख रहेगा कि मेरे द्वारा त्यागे गए ये बालक यहाँ अवश्य जीवित नहीं रह सकेंगे ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.156.39 
आत्मानमपि चोत्सृज्य तप्स्यामि परलोकग:।
त्यक्ता ह्येते मया व्यक्तं नेह शक्ष्यन्ति जीवितुम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जब मैं अपने को त्यागकर परलोक में चला जाऊँगा, तब भी मुझे सदैव इस बात का दुःख रहेगा कि मेरे द्वारा त्यागे गए ये बालक यहाँ अवश्य जीवित नहीं रह सकेंगे ॥39॥
 
Even when I abandon myself and go to the next world, I will always be anguished about the fact that these children abandoned by me will certainly not be able to survive here. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)