Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.156.31: प्रिये! तुम मेरी जीवनसंगिनी और मेरी इन्द्रियों को वश में रखने वाली हो। तुम सदैव मेरी रक्षा करती हो और माता के समान मेरा पालन-पोषण करती हो। देवताओं ने तुम्हें मेरा सखा (सहायक) बनाया है। तुम सदैव मेरी परम मोक्ष (सबसे बड़ा आधार) हो।॥ 31॥ | mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रिये! तुम मेरी जीवनसंगिनी और मेरी इन्द्रियों को वश में रखने वाली हो। तुम सदैव मेरी रक्षा करती हो और माता के समान मेरा पालन-पोषण करती हो। देवताओं ने तुम्हें मेरा सखा (सहायक) बनाया है। तुम सदैव मेरी परम मोक्ष (सबसे बड़ा आधार) हो।॥ 31॥
Dear! You are my life partner and the one who controls my senses. You are always careful and nurture me like a mother. The gods have made you my friend (helper). You are always my ultimate salvation (biggest support).॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥