Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.156.3-4: जनमेजय! उस समय सभी पाण्डव नाना प्रकार के सुन्दर वनों, रमणीय प्रदेशों, नदियों और सरोवरों का भ्रमण करते हुए भिक्षावृत्ति द्वारा अपना जीवन निर्वाह करते थे। अपने उत्तम गुणों के कारण वे समस्त प्रजा के प्रिय बन गए थे।॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रमणीयानि पश्यन्तो वनानि विविधानि च।
पार्थिवानपि चोद्देशान् सरितश्च सरांसि च॥ ३॥
चेरुर्भैक्षं तदा ते तु सर्व एव विशाम्पते।
बभूवुर्नागराणां च स्वैर्गुणै: प्रियदर्शना:॥ ४॥
अनुवाद
जनमेजय! उस समय सभी पाण्डव नाना प्रकार के सुन्दर वनों, रमणीय प्रदेशों, नदियों और सरोवरों का भ्रमण करते हुए भिक्षावृत्ति द्वारा अपना जीवन निर्वाह करते थे। अपने उत्तम गुणों के कारण वे समस्त प्रजा के प्रिय बन गए थे।॥3-4॥
Janamejaya! At that time all the Pandavas lived by begging while visiting various beautiful forests, beautiful lands, rivers and lakes. Due to their excellent qualities they became the favourites of all the citizens. ॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥