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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्गार
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श्लोक 15
श्लोक
1.156.15
तदिदं ब्राह्मणस्यास्य दु:खमापतितं ध्रुवम्।
तत्रास्य यदि साहाय्यं कुर्यामुपकृतं भवेत्॥ १५॥
अनुवाद
‘यह ब्राह्मण इस समय अवश्य ही किसी बड़े संकट में है। यदि मैं इसमें इसकी सहायता करूँ, तो यह सच्ची सहायता होगी।’॥15॥
‘This Brahmin is surely going through some great trouble right now. If I help him in that, then it would be a real help.’॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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