Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.156.13: 'इसलिए हे पुत्र! मैं सदैव यही सोचता रहता हूँ कि इस ब्राह्मण के लिए मुझे कौन-सा प्रिय कार्य करना चाहिए, जो किसी के घर में सुखपूर्वक रहने वाले लोग करते हैं।॥13॥ | mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सा चिन्तये सदा पुत्र ब्राह्मणस्यास्य किं न्वहम्।
प्रियं कुर्यामिति गृहे यत् कुर्युरुषिता: सुखम्॥ १३॥
अनुवाद
'इसलिए हे पुत्र! मैं सदैव यही सोचता रहता हूँ कि इस ब्राह्मण के लिए मुझे कौन-सा प्रिय कार्य करना चाहिए, जो किसी के घर में सुखपूर्वक रहने वाले लोग करते हैं।॥13॥
'Therefore, son, I always keep thinking about what favourite work I should do for this Brahmin, which is done by people who live happily in someone's house.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥