Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.156.11-12: उस समय उनका दुःख कुन्तीदेवी के हृदय को मथता हुआ प्रतीत हो रहा था। अतः दयालु कुन्ती ने भीमसेन से इन करुणापूर्ण शब्दों में कहा - 'बेटा! हम लोग दुर्योधन से अनजान रहकर इस ब्राह्मण के घर में बहुत सुख से रह रहे हैं। यहाँ हमारा इतना आदर-सत्कार हुआ है कि हम अपना दुःख और कष्ट भूल गए हैं।' 11-12. | mahabharat अध्याय 1.156: ब्राह्मणपरिवारका कष्ट दूर करनेके लिये कुन्तीकी भीमसेनसे बातचीत तथा ब्राह्मणके चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय उनका दुःख कुन्तीदेवी के हृदय को मथता हुआ प्रतीत हो रहा था। अतः दयालु कुन्ती ने भीमसेन से इन करुणापूर्ण शब्दों में कहा - 'बेटा! हम लोग दुर्योधन से अनजान रहकर इस ब्राह्मण के घर में बहुत सुख से रह रहे हैं। यहाँ हमारा इतना आदर-सत्कार हुआ है कि हम अपना दुःख और कष्ट भूल गए हैं।' 11-12.
At that time, his sorrow seemed to be churning the heart of Kunti Devi. Therefore, the benevolent Kunti spoke to Bhimasena in these compassionate words - 'Son! We are living very happily in this Brahmin's house, remaining unknown to Duryodhan. We have been honoured so well here that we have forgotten our sorrow and misery. 11-12.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥