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mahabharat 1.154.2: यह सुनकर युधिष्ठिर ने कहा- पुरुषसिंह भीम! क्रोध में भरे होने पर भी स्त्री का वध मत करो। पाण्डुनन्दन! शरीर की रक्षा से भी अधिक तत्परता से धर्म की रक्षा करो॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.154.2 
युधिष्ठिर उवाच
क्रुद्धोऽपि पुरुषव्याघ्र भीम मा स्म स्त्रियं वधी:।
शरीरगुप्त्यभ्यधिकं धर्मं गोपाय पाण्डव॥ २॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर युधिष्ठिर ने कहा- पुरुषसिंह भीम! क्रोध में भरे होने पर भी स्त्री का वध मत करो। पाण्डुनन्दन! शरीर की रक्षा से भी अधिक तत्परता से धर्म की रक्षा करो॥2॥
 
Hearing this, Yudhishthir said – Purushasingh Bhima! Even though you are full of anger, do not kill a woman. Pandunandan! Protect religion with more diligence than protecting the body. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)