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mahabharat 1.150.8: हे भरतश्रेष्ठ! संध्या होते-होते वे वन के एक भयंकर प्रदेश में पहुँच गए, जहाँ फल, मूल और जल का घोर अभाव था। वहाँ क्रूर पक्षी और हिंसक पशु रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.150.8 
अगमच्च वनोद्देशमल्पमूलफलोदकम्।
क्रूरपक्षिमृगं घोरं सायाह्ने भरतर्षभ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! संध्या होते-होते वे वन के एक भयंकर प्रदेश में पहुँच गए, जहाँ फल, मूल और जल का घोर अभाव था। वहाँ क्रूर पक्षी और हिंसक पशु रहते थे।
 
O best of the Bharatas! By the time the evening fell, they reached a dreadful region of the forest, where there was a great scarcity of fruits, roots and water. There lived cruel birds and ferocious animals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)