Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.150.44-45: उस समय भीमसेन इस प्रकार सोचने लगे - 'अहा! इस वन से थोड़ी ही दूरी पर एक नगर दिखाई देता है। ऐसे समय में भी, जब हमें जागना चाहिए, मेरे ये भाई सो रहे हैं। अच्छा, मैं स्वयं इन्हें जगाता हूँ। जब ये थककर जागेंगे, तभी मैं जल पीऊँगा।' ऐसा निश्चय करके भीमसेन स्वयं उस समय जागने लगे। | mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय भीमसेन इस प्रकार सोचने लगे - 'अहा! इस वन से थोड़ी ही दूरी पर एक नगर दिखाई देता है। ऐसे समय में भी, जब हमें जागना चाहिए, मेरे ये भाई सो रहे हैं। अच्छा, मैं स्वयं इन्हें जगाता हूँ। जब ये थककर जागेंगे, तभी मैं जल पीऊँगा।' ऐसा निश्चय करके भीमसेन स्वयं उस समय जागने लगे।
At that time Bhima started thinking like this - 'Oh! A city is visible at a short distance from this forest. Even at such a time when we should be awake, these brothers of mine are sleeping. Well, I will wake them up myself. When they will wake up after getting tired, then only will I drink water.' Having decided so, Bhimasena himself started staying awake at that time. 44-45.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि जतुगृहपर्वणि भीमजलाहरणे पञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत जतुगृहपर्वमें भीमसेनके जल ले आनेसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥