Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.150.37: आज हम उस जलती हुई अग्नि से मुक्त होकर इस वृक्ष के नीचे शरण लिए हुए हैं। हमें यह भी नहीं मालूम कि किस दिशा में जाना है। हमें महान कष्ट हो रहे हैं॥ 37॥ | mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आज हम उस जलती हुई अग्नि से मुक्त होकर इस वृक्ष के नीचे शरण लिए हुए हैं। हमें यह भी नहीं मालूम कि किस दिशा में जाना है। हमें महान कष्ट हो रहे हैं॥ 37॥
‘Today, free from that burning fire, we are taking shelter under this tree. We do not even know which direction to go. We are suffering great hardships.॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥