शयनेषु परार्घ्येषु ये पुरा वारणावते।
नाधिजग्मुस्तदा निद्रां तेऽद्य सुप्ता महीतले॥ २३॥
अनुवाद
‘पहले जब हम वारणावत नगर में थे, तब जो लोग बहुमूल्य शय्याओं पर भी नहीं सो पाते थे, वही लोग आज पृथ्वी पर सो रहे हैं!॥23॥
‘Earlier, when we were in the city of Varanavat, those who could not sleep even on precious beds are the same people who are sleeping on the earth today!॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥