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mahabharat 1.149.5: 'निश्चय ही इस विषय में शान्तनु नन्दन भीष्मजी भी धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं। द्रोण, विदुर, कृपाचार्य तथा अन्य कौरवों की भी यही स्थिति है॥ 5॥   |   mahabharat अध्याय 1.149: धृतराष्ट्र आदिके द्वारा पाण्डवोंके लिये शोकप्रकाश एवं जलांजलिदान तथा पाण्डवोंका वनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 149: धृतराष्ट्र आदिके द्वारा पाण्डवोंके लिये शोकप्रकाश एवं जलांजलिदान तथा पाण्डवोंका वनमें प्रवेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.149.5 
नूनं शांतनवोऽपीह न धर्ममनुवर्तते।
द्रोणश्च विदुरश्चैव कृपश्चान्ये च कौरवा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'निश्चय ही इस विषय में शान्तनु नन्दन भीष्मजी भी धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं। द्रोण, विदुर, कृपाचार्य तथा अन्य कौरवों की भी यही स्थिति है॥ 5॥
 
‘Certainly in this matter even Shantanu Nandan Bhishmaji is not following Dharma. Drona, Vidur, Kripacharya and other Kauravas are also in the same condition.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)