श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 146: विदुरके भेजे हुए खनकद्वारा लाक्षागृहमें सुरंगका निर्माण  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  1.146.13-14 
समृद्धमायुधागारमिदं तस्य दुरात्मन:।
वप्रान्तं निष्प्रतीकारमाश्रित्येदं कृतं महत्॥ १३॥
इदं तदशुभं नूनं तस्य कर्म चिकीर्षितम्।
प्रागेव विदुरो वेद तेनास्मानन्वबोधयत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यह उस दुष्टात्मा का शस्त्रागार है, जो अस्त्र-शस्त्रों से भरा हुआ है। इसी के सहयोग से यह विशाल भवन निर्मित हुआ है। इसकी चारदीवारी के निकट कहीं भी बाहर निकलने का मार्ग नहीं है। विदुरजी को दुर्योधन के इस अशुभ कृत्य का ज्ञान अवश्य ही रहा होगा, जिसे वह पूर्ण करना चाहता है। इसीलिए उन्होंने हमें इसकी सूचना दी है॥13-14॥
 
‘This is the arsenal of that evil soul, filled with weapons. This great house has been built with its help. There is no way of exit anywhere near the boundary wall. Vidurji must have already known about this inauspicious act of Duryodhan, which he wants to complete. That is why he informed us about it.॥ 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)