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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 146: विदुरके भेजे हुए खनकद्वारा लाक्षागृहमें सुरंगका निर्माण
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श्लोक 11
श्लोक
1.146.11
स पाप: कोषवांश्चैव ससहायश्च दुर्मति:।
अस्मानपि च पापात्मा नित्यकालं प्रबाधते॥ ११॥
अनुवाद
'पापी दुर्योधन के पास धन है और उसके बहुत से सहायक हैं; इसीलिए यह दुष्टबुद्धिवाला पापी जीव हमें सदैव सताता रहता है॥ 11॥
'The sinner Duryodhan has a treasure and he has many helpers; that is why this evil-minded, sinful soul always torments us.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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