Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.145.25: अथवा यह भी सम्भव है कि हमारे यहाँ जला दिए जाने पर हमारे पितामह भीष्म तथा कुरुवंश के अन्य महापुरुष अपना कर्तव्य समझकर उन अत्याचारियों पर क्रोध करें (परन्तु वह क्रोध हमें किस काम का?)॥25॥   |   mahabharat अध्याय 1.145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 145: वारणावतमें पाण्डवोंका स्वागत, पुरोचनका सत्कारपूर्वक उन्हें ठहराना, लाक्षागृहमें निवासकी व्यवस्था और युधिष्ठिर एवं भीमसेनकी बातचीत  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.145.25 
अथवापीह दग्धेषु भीष्मोऽस्माकं पितामह:।
धर्म इत्येव कुप्येरन् ये चान्ये कुरुपुङ्गवा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अथवा यह भी सम्भव है कि हमारे यहाँ जला दिए जाने पर हमारे पितामह भीष्म तथा कुरुवंश के अन्य महापुरुष अपना कर्तव्य समझकर उन अत्याचारियों पर क्रोध करें (परन्तु वह क्रोध हमें किस काम का?)॥25॥
 
Or it is possible that after we are burnt here, our grandfather Bhishma and other great men of the Kuru clan, considering it their duty, may get angry at those tyrants (but of what avail will that anger be to us?)॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)