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mahabharat 1.144.8: 'पापरहित अन्तःकरण वाले पाण्डुकुमार युधिष्ठिर, बलवानों में श्रेष्ठ भीमसेन अथवा कुन्तिनीपुत्र अर्जुन कभी पाप से प्रेम नहीं करेंगे ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.144: पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा तथा उनको विदुरका गुप्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 144: पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा तथा उनको विदुरका गुप्त उपदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.144.8 
न हि पापमपापात्मा रोचयिष्यति पाण्डव:।
भीमो वा बलिनां श्रेष्ठ: कौन्तेयो वा धनंजय:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'पापरहित अन्तःकरण वाले पाण्डुकुमार युधिष्ठिर, बलवानों में श्रेष्ठ भीमसेन अथवा कुन्तिनीपुत्र अर्जुन कभी पाप से प्रेम नहीं करेंगे ॥8॥
 
'Pandukumar Yudhishthir, who has a sinless conscience, Bhimsen, the best among the strong, or Arjun, the son of Kuntini, will never love sin. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)