Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.144.5-6: उस समय महाज्ञानी विदुर आदि कुरुकुल के अन्य महापुरुष तथा प्राचीन लोग शोक से भयभीत होकर पुरुषोत्तम पाण्डवों का पीछा करने लगे। तब कुछ निर्भय ब्राह्मण पाण्डवों को ऐसी दीन दशा में देखकर अत्यन्त दुःखी हुए और इस प्रकार बोले - 5-6॥   |   mahabharat अध्याय 1.144: पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा तथा उनको विदुरका गुप्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 144: पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा तथा उनको विदुरका गुप्त उपदेश  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  1.144.5-6 
विदुरश्च महाप्राज्ञस्तथान्ये कुरुपुङ्गवा:।
पौराश्च पुरुषव्याघ्रानन्वीयु: शोककर्शिता:॥ ५॥
तत्र केचिद् ब्रुवन्ति स्म ब्राह्मणा निर्भयास्तदा।
दीनान् दृष्ट्वा पाण्डुसुतानतीव भृशदु:खिता:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस समय महाज्ञानी विदुर आदि कुरुकुल के अन्य महापुरुष तथा प्राचीन लोग शोक से भयभीत होकर पुरुषोत्तम पाण्डवों का पीछा करने लगे। तब कुछ निर्भय ब्राह्मण पाण्डवों को ऐसी दीन दशा में देखकर अत्यन्त दुःखी हुए और इस प्रकार बोले - 5-6॥
 
At that time, the great wise Vidur and other great men of Kurukula and the ancient people, frightened with grief, started following the best of men, the Pandavas. Then some fearless Brahmins were very sad to see the Pandavas in such a poor condition and said thus - 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)