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mahabharat 1.144.24: जिसके पास आँखें नहीं हैं, वह मार्ग नहीं जान सकता; अन्धा दिशा नहीं जानता; और जो धैर्य खो देता है, उसे बुद्धि नहीं मिलती। इस प्रकार जब मैं तुम्हें समझाऊँगा, तब तुम मेरे वचनों को अच्छी तरह समझ सकोगे॥24॥   |   mahabharat अध्याय 1.144: पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा तथा उनको विदुरका गुप्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 144: पाण्डवोंकी वारणावत-यात्रा तथा उनको विदुरका गुप्त उपदेश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.144.24 
नाचक्षुर्वेत्ति पन्थानं नाचक्षुर्विन्दते दिश:।
नाधृतिर्बुद्धिमाप्नोति बुध्यस्वैवं प्रबोधित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जिसके पास आँखें नहीं हैं, वह मार्ग नहीं जान सकता; अन्धा दिशा नहीं जानता; और जो धैर्य खो देता है, उसे बुद्धि नहीं मिलती। इस प्रकार जब मैं तुम्हें समझाऊँगा, तब तुम मेरे वचनों को अच्छी तरह समझ सकोगे॥24॥
 
‘He who has no eyes cannot know the way; a blind man does not know the directions and he who loses patience does not get good sense. When I explain to you in this manner, you will understand my words well*॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)