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mahabharat 1.140.5: उन्होंने एक सुदृढ़ नाव बनाई, जिसमें उसे चलाने के लिए एक यंत्र लगा था। वह नाव हवा और लहरों का वेग सहन करने में समर्थ थी। उसमें ध्वजाएँ और पताकाएँ लहरा रही थीं। उस नाव को तैयार करके विदुर जी ने कुन्ती से कहा -॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.140.5 
ततो वातसहां नावं यन्त्रयुक्तां पताकिनीम्।
ऊर्मिक्षमां दृढां कृत्वा कुन्तीमिदमुवाच ह॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने एक सुदृढ़ नाव बनाई, जिसमें उसे चलाने के लिए एक यंत्र लगा था। वह नाव हवा और लहरों का वेग सहन करने में समर्थ थी। उसमें ध्वजाएँ और पताकाएँ लहरा रही थीं। उस नाव को तैयार करके विदुर जी ने कुन्ती से कहा -॥5॥
 
He built a strong boat, which was fitted with a machine to steer it. It was capable of withstanding the force of the wind and the waves. Flags and banners were fluttering in it. After getting that boat ready, Vidur ji said to Kunti -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)