Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.140.35: यदि पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर पाण्डु के राज्य के उत्तराधिकारी हों, जिनका उत्तराधिकारी केवल पुत्र ही है, तो निश्चय ही उनके पश्चात् उनका पुत्र इस राज्य का उत्तराधिकारी होगा और उनके पश्चात् पुनः उनके पुत्रों के वंश में अन्य व्यक्ति इसके स्वामी बनेंगे ॥ 35॥ | mahabharat अध्याय 1.140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स एष पाण्डोर्दायाद्यं यदि प्राप्नोति पाण्डव:।
तस्य पुत्रो ध्रुवं प्राप्तस्तस्य तस्यापि चापर:॥ ३५॥
अनुवाद
यदि पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर पाण्डु के राज्य के उत्तराधिकारी हों, जिनका उत्तराधिकारी केवल पुत्र ही है, तो निश्चय ही उनके पश्चात् उनका पुत्र इस राज्य का उत्तराधिकारी होगा और उनके पश्चात् पुनः उनके पुत्रों के वंश में अन्य व्यक्ति इसके स्वामी बनेंगे ॥ 35॥
If Yudhishthira, the son of Pandu, inherits the kingdom of Pandu, whose heir is only a son, then certainly after him his son will inherit this kingdom and after him again other persons in the lineage of his sons will become its owners. ॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥