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mahabharat 1.140.32: दुर्योधन बोला, 'पिताजी! मैंने नगरवासियों के मुख से आपस में बातचीत करते हुए (अत्यंत) अशुभ बातें सुनी हैं। वे आपका और भीष्मजी का अनादर करके पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर को राजा बनाना चाहते हैं।'   |   mahabharat अध्याय 1.140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.140.32 
दुर्योधन उवाच
श्रुता मे जल्पतां तात पौराणामशिवा गिर:।
त्वामनादृत्य भीष्मं च पतिमिच्छन्ति पाण्डवम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन बोला, 'पिताजी! मैंने नगरवासियों के मुख से आपस में बातचीत करते हुए (अत्यंत) अशुभ बातें सुनी हैं। वे आपका और भीष्मजी का अनादर करके पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर को राजा बनाना चाहते हैं।'
 
Duryodhan said, 'Father! I have heard (very) ominous things from the mouth of the people of the city while talking to each other. They want to make Pandava's son Yudhishthira the king by disrespecting you and Bhishmaji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)