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mahabharat 1.140.27: पाण्डवों के बड़े भाई युधिष्ठिर यद्यपि अभी युवा हैं, तथापि उनका स्वभाव और स्वभाव वृद्धों के समान है। वे सत्यवादी, दयालु और वेदों के ज्ञाता हैं; अतः अब हमें उन्हें विधिपूर्वक राजा बनाना चाहिए॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 1.140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.140.27 
ते वयं पाण्डवज्येष्ठं तरुणं वृद्धशीलिनम्।
अभिषिञ्चाम साध्वद्य सत्यकारुण्यवेदिनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों के बड़े भाई युधिष्ठिर यद्यपि अभी युवा हैं, तथापि उनका स्वभाव और स्वभाव वृद्धों के समान है। वे सत्यवादी, दयालु और वेदों के ज्ञाता हैं; अतः अब हमें उन्हें विधिपूर्वक राजा बनाना चाहिए॥ 27॥
 
‘Although Yudhishthira, the elder brother of the Pandavas, is still young, his character and nature is like that of an old man. He is truthful, kind and a knower of the Vedas; therefore, we should now crown him as the king in a proper manner.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)