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mahabharat 1.140.21: तब सूर्यपुत्र कर्ण और सुबलपुत्र शकुनि विभिन्न उपायों से पाण्डवों को मारने की इच्छा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 140: पाण्डवोंके प्रति पुरवासियोंका अनुराग देखकर दुर्योधनकी चिन्ता  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.140.21 
ततो वैकर्तन: कर्ण: शकुनिश्चापि सौबल:।
अनेकैरभ्युपायैस्ते जिघांसन्ति स्म पाण्डवान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब सूर्यपुत्र कर्ण और सुबलपुत्र शकुनि विभिन्न उपायों से पाण्डवों को मारने की इच्छा करने लगे।
 
Then Surya's son Karna and Shakuni, the son of Subala, began to desire to kill the Pandavas by various means.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)