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श्लोक 1.14.7  |
एवमुक्त्वा तत: प्रादाद् भार्यार्थे वरवर्णिनीम्।
स च तां प्रतिजग्राह विधिदृष्टेन कर्मणा॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| यह कहकर वासुकि ने उस सुन्दर कन्या को ऋषि को पत्नी रूप में दे दिया। ऋषि ने शास्त्रविधि अनुसार उससे विवाह भी कर लिया। |
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| Saying this, Vasuki gave the beautiful girl to the sage as his wife. The sage also married her according to the scriptures. |
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इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि वासुकिस्वसृवरणे चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें वासुकिकी बहिनके वरणसे सम्बन्ध रखनेवाला चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४॥
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