श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  1.139.81 
नास्य कृत्यानि बुध्येरन् मित्राणि रिपवस्तथा।
आरब्धान्येव पश्येरन् सुपर्यवसितान्यपि॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
राजा क्या करना चाहता है, यह न तो मित्र को पता चले और न ही शत्रु को। (सबको) उसे तभी देखना चाहिए जब कार्य आरम्भ हो जाए या समाप्त हो जाए॥ 81॥
 
Neither friend nor foe should know what the king wants to do. (Everyone) should see him only when the work has begun or is over.॥ 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)