श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  1.139.76 
मन्त्रसंवरणे यत्न: सदा कार्योऽनसूयता।
आकारमभिरक्षेत चारेणाप्यनुपालित:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
राजा को दूसरों के दोष प्रकट नहीं करने चाहिए तथा अपनी गुप्त बातें सदैव गुप्त रखने का प्रयास करना चाहिए। उसे अपना रूप-रंग (यहाँ तक कि क्रोध-प्रसन्नता आदि के हाव-भाव) भी दूसरों के गुप्तचरों से गुप्त रखना चाहिए; किन्तु अपनी गुप्त बातों को अपने गुप्तचरों से भी सदैव सुरक्षित रखना चाहिए। 76.
 
The king should not reveal the faults of others and should always try to keep his secret counsels hidden. He should keep even his appearance (even the gestures indicating anger and happiness etc.) secret from the spies of others; but he should always protect his secret counsels even from his own spies. 76.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)