श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  1.139.58 
अपि घोरापराधस्य धर्ममाश्रित्य तिष्ठत:।
स हि प्रच्छाद्यते दोष: शैलो मेघैरिवासितै:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
धर्म के मार्ग पर चलने का दिखावा करने से घोर अपराधी का दोष उसी प्रकार ढक जाता है, जैसे काले बादलों से पर्वत ढक जाता है ॥ 58॥
 
By pretending to follow the path of Dharma, the fault of a grave offender is covered just as a mountain is covered by dark clouds. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)