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mahabharat 1.139.57: शत्रु को समझाकर, धर्म समझाकर, धन देकर और अच्छा व्यवहार करके उसे आश्वस्त करो; उसमें विश्वास उत्पन्न करो; फिर समय आने पर जब वह सत्यमार्ग से विचलित हो, तब उस पर आक्रमण करो ॥57॥   |   mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  1.139.57 
आश्वासयेच्चापि परं सान्त्वधर्मार्थवृत्तिभि:।
अथास्य प्रहरेत् काले यदा विचलिते पथि॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
शत्रु को समझाकर, धर्म समझाकर, धन देकर और अच्छा व्यवहार करके उसे आश्वस्त करो; उसमें विश्वास उत्पन्न करो; फिर समय आने पर जब वह सत्यमार्ग से विचलित हो, तब उस पर आक्रमण करो ॥57॥
 
By convincing the enemy, explaining the Dharma, giving him money and behaving well, assure him; create faith in him; then, when the time comes, as soon as he strays from the right path, attack him. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)