Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.139.52: चाहे पुत्र हो, मित्र हो, भाई हो, पिता हो या गुरु हो, यदि कोई भी शत्रु के यहाँ आकर शत्रुतापूर्ण व्यवहार करने लगे, तो यश की इच्छा रखने वाला राजा अवश्य ही उसका वध कर देगा ॥52॥ | mahabharat अध्याय 1.139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुत्र: सखा वा भ्राता वा पिता वा यदि वा गुरु:।
रिपुस्थानेषु वर्तन्तो हन्तव्या भूतिमिच्छता॥ ५२॥
अनुवाद
चाहे पुत्र हो, मित्र हो, भाई हो, पिता हो या गुरु हो, यदि कोई भी शत्रु के यहाँ आकर शत्रुतापूर्ण व्यवहार करने लगे, तो यश की इच्छा रखने वाला राजा अवश्य ही उसका वध कर देगा ॥52॥
Be it son, friend, brother, father or teacher, if anyone comes to the enemy's place and starts behaving in a hostile manner, then the king who is desirous of glory will definitely kill him. 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥