श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 139: कणिकका धृतराष्ट्रको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 38-40h
 
 
श्लोक  1.139.38-40h 
व्याघ्र उवाच
ब्रवीति यदि स ह्येवं काले ह्यस्मिन् प्रबोधित:।
स्वबाहुबलमाश्रित्य हनिष्येऽहं वनेचरान्॥ ३८॥
खादिष्ये तत्र मांसानि इत्युक्त्वा प्रस्थितो वनम्।
एतस्मिन्नेव काले तु मूषिकोऽप्याजगाम ह॥ ३९॥
तमागतमभिप्रेत्य शृगालोऽप्यब्रवीद् वच:।
 
 
अनुवाद
बाघ बोला - अगर वह ऐसी बात कहता है, तो उसने मेरी आँखें खोल दी हैं - मुझे सचेत कर दिया है। आज से मैं अपने बल पर ही वन के पशुओं को मारकर उनका मांस खाऊँगा। यह कहकर बाघ जंगल में चला गया। उसी समय चूहा भी वहाँ (स्नान करके) पहुँच गया। उसे आते देख सियार बोला - 38-39 1/2।
 
The tiger said - If he says such a thing, then he has opened my eyes - alerted me. From today onwards I will kill the forest animals relying on my own strength and eat their meat. Saying this the tiger went into the forest. At the same time the mouse also reached there (after bathing). Seeing him coming the jackal said - 38-39 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)